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ओम पुरी की आखिरी फिल्म मिस्टर कबाड़ी की कहानी

मुंबई। हास्य और व्यंग्य से भरपूर फिल्म मिस्टर कबाड़ी प्रसिद्ध अभिनेता स्वर्गीय ओम पुरी की आखिरी फिल्म है। खास बात यह है कि इस फिल्म का निर्देशन ओम पुरी की पहली पत्नी सीमा कपूर ने किया है। फिल्म की कहानी भी सीमा कपूर ने लिखी है। जागरण डॉट कॉम के राहुल सोनी से खास बातचीत के दौरान सीमा कपूर ने फिल्म से जुड़ी कई दिलचस्प बातें बताई। यह फिल्म 8 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। निर्देशन ओम छंगानी और अनूप जलोटा ने किया है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू –

 

फिल्म के निर्देशन में क्या खास रहेगा

1986 में पहला सीरियल किले का रहस्य का निर्देशन किया था। तब से ही निर्देशन में दिलचस्पी रही है। इसलिए थिएटर हो, टीवी सीरियल हो या फिल्में निर्देशन में हमेशा जोर रहा है। इस बार मिस्टर कबाड़ी में हास्य के साथ व्यंग्य प्रस्तुत किया है, जिससे लोगों को हास्य के जरिए संदेश दिया जा सके।

फिल्म में थिएटर की कितनी मदद मिली

थिएटर अलग विधा है। थिएटर में लॉन्ग शॉट में दर्शक देखते हैं। टीवी क्लोज़अप में चलता है। और सिनेमा समझ लीजिए कि आपकी आंख है जिसका थोड़ा सा सूक्ष्म रूप है। जिसे कंडेंस या वाइड कर सकते हैं जितनी आंख भी न देख पाए। सिनेमा जो है थिएटर और टीवी का विस्तृत रूप है। सिनेमा में कट्स फास्ट होते हैं। हम लोग सौभाग्यशाली रहे हैं कि हमने वो विधा भी देखी है। हमने वो जमाना भी देखा कि जब रेडियो ही होता था। एक साल में दो फिल्म देखते थे। उस समय मनोरंजन सिमट कर कानों में रह गया था। हमने वो सारा समय देखा। थिएटर वैसे कॉलेज में होता है शौकिया तौर पर। लेकिन हमने प्रोफेशनली भी किया है। अगर थिएटर देखने का टिकट लगता है तो कलाकारों को परफेक्शन के साथ काम करना होता है। चूंकि थिएटर में साहित्य, संगीत, अभिनय, आर्ट इन सबकी की जरुरत होती है तो फिल्म में कोई मुश्किल नहीं हुई।

ओम पुरी की सबसे खास बात आपको क्या लगती है

पद्मश्री मिलने के बाद उन्होंने हॉलीवुड फिल्म भी की। इसके बाद भी वो कभी भी छोटे रोल्स को मना नहीं करते थे। मुझे याद है कि मेरे नाटक में वो एक छोटा सा किरदार निभा रहे थे। इसको लेकर वो इतने सजग थे कि सुबह 4 बजे उठकर स्क्रिप्ट पढ़ते थे। रोल छोटा होने के बावजूद वो मुझे बिठाकर पूछते थे कि इसके बारे में और ज्यादा बताओ जिससे वो अच्छे से परफॉर्म कर सकें। इतने बड़े अभिनेता को तो यूं ही कॉन्फीडेंस आ जाता है लेकिन वो जबरदस्त अभ्यास करते थे जिससे पूरा सौ प्रतिशत दे सकें।

 

फिल्म में गीतों को लेकर कोई खास बात

फिल्म को ओम छंगानी और अनूप जलोटा ने प्रोड्यूस किया है। यह अच्छी बात है कि ओम जहां एक ओर फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उन्होंने फिल्म का एक गाना भी लिखा है। उन्हें संगीत में काफी दिलचस्पी है। फिल्म में एक दृश्य है जिसमें अनूप जलोटा शौचालय के उद्घाटन के दौरान भजन गाते हैं। इसी भजन को ओम ने लिखा है।

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