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जासूस समझ जिस वैज्ञानिक को कहा गया गद्दार, बेकसूर निकलने पर मिला 1.30 करोड़ का मुआवजा

Nambi Narayanan
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तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन (Nambi Narayanan) को ढाई दशक पुराने जासूसी मामले के निपटारे के लिए 1.30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया है। केरल पुलिस ने नारायणन को न सिर्फ फर्जी मुकदमे में फंसाया था, बल्कि उन्हें जेल, दुर्भावनापूर्ण अभियोजन और अपमान भी झेलना पड़ा था। वहीं, इससे पहले, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी उन्हें 10 लाख रुपये की राहत देने का आदेश दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुआवजे की राशि का चेक स्वीकार करते हुए नारायणन (Nambi Narayanan) ने कहा कि मैं खुश हूं। मेरे द्वारा लड़ी गई लड़ाई धन के लिए नहीं है। मेरी लड़ाई अन्याय के खिलाफ थी। नारायणन को अब तक 1.90 करोड़ रुपये का मुआवजा मिल चुका है।

79 वर्षीय नारायणन (Nambi Narayanan) द्वारा तिरुवनंतपुरम में सत्र न्यायालय में 2018 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामला दर्ज किया गया था। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था, इस मामले में उनकी गिरफ्तारी अनावश्यक थी और उन्हें फंसाया गया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व वैज्ञानिक को 50 लाख रुपये की अंतरिम राहत देने का आदेश दिया था।

Nambi Narayanan: यह था मामला

वर्ष 1994 के इसरो जासूसी मामले में नारायणन (Nambi Narayanan) को उनके वरिष्ठ अफसरों, मालदीव की दो महिलाओं और एक कारोबारी के साथ गिरफ्तार किया गया था। इन पर दुश्मन देशों को काउंटी के क्रायोजेनिक इंजन प्रौद्योगिकी के कुछ गोपनीय दस्तावेजों और रहस्यों के हस्तांतरण के आरोपों से संबंधित है। सीबीआइ ने वर्ष 1995 में नारायणन को क्लीनचिट दे दी थी। इसके बाद उन्होंने आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ दी थी। हालांकि, इस मामले में अब तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक को फंसाने के मामले में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक एस मैथ्यूज, डीएसपी केके जोशुआ और एस विजयन के नाम सामने आए थे।

इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था। इस सनसनीखेज मामले पर कई किताबें लिखी गईं और अभिनेता निर्देशक आर माधवन ने नारायणन (Nambi Narayanan) पर एक बायोपिक भी बनाई, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरण के साथ इन आरोपों के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी। कोरोना वायरस महामारी के कारण फिल्म की रिलीज में देरी हुई है। वहीं, नारायणन को पिछले साल पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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