साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली उत्तराखंड सरकार के पास पर्वतारोहण के लिए पैसे नहीं।

पर्वतारोहण के शौकीनों को उत्तराखंड सरकार राहत देने के मूड में है। सरकार साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्वतारोहण के लिए निर्धारित शुल्क में कटौती करने की योजना बना रही है। भारतीय पर्वतारोहियों के लिए शुल्क में कमी करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जल्द ही विदेशी पर्वतारोहियों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पर्वतारोहण इसमें सबसे पसंदीदा क्षेत्र माना जाता है। उत्तराखंड में करीब 81 हिमशिखर ऐसे हैं जिन पर आरोहण के लिए हर साल बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटक यहां आते हैं।

पर्वतारोण शुल्क बढ़ने से घटी संख्या

पर्यटकों की संख्या को देखते हुए 2004 में राज्य सरकार ने इसके लिए गाइड लाइन जारी की और रिजर्व फॉरेस्ट से बाहर के क्षेत्र में पर्वतारोहण के लिए तीन चरणों में अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया था। विदेशी पर्वतारोहियों के लिए 80, 65, 55 हजार रुपए और देशी पर्वतारोहियों के लिए 14 , साढ़े ग्यारह, साढ़े दस हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया था। सरकार की मानें तो शुल्क में वृद्धि के कारण यात्रियों की संख्या में गिरावट आने लगी है। बढ़ी फीस के साथ ही पर्वतारोहण की अनुमति के लिए भी कई जगह भटकने की वजह से भी पर्यटक उत्तराखंड आने में कतरा रहे हैं।

हिमाचल और जम्मू-कश्मीर की तुलना में उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों की संख्या कम है। इन स्थितियों के चलते अब पर्यटन विभाग पर्यटन विभाग सिंगल विंडो सिस्टम तैयार करने पर भी विचार कर रहा है। जिससे एक ही स्थान पर पर्यटकों के लिए सारी सुविधाएं होंगी।

पर्यटन विभाग ने इन सब के चलते शुल्क घटाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें विदेशी पर्यटको से लिया जान वाला शुल्क आधा करने का सुझाव है। देसी पर्यटकों को पांच गुना तक राहत दिए जाने का प्रस्ताव है। वन विभाग यह भी चाहता है कि संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर पर्वतारोहण को निशुल्क कर दिया जाए।

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