helping hands

बेटे के पैसों से गरीबों की सेवा का जुनून

अपने पैसे से गरीबों की सेवा के उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं। पंजाब में
फाजिल्का जिले के अबोहर में आर्य महिला परोपकारिणी सभा की प्रमुख जमुना देवी चावला इस मामले में एक मिसाल की तरह हैं। वह बीस वर्षों से हर महीने 60 से अधिक परिवारों को राशन उपलब्ध करवा रही हैं। इस कार्य में मदद करते हैं उनके गोद लिए बेटे सुरेंद्र, जो अब इंग्लैंड में रहते हैं। वह हर माह अपनी मां जमुना देवी को पैसे भेजते हैं, जिसे वह गरीबों पर खर्च करती हैं।

जमुना देवी चावला की उम्र इस समय 92 वर्ष हो गई है और स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है। अब वह पूर्ण रूप से बिस्तर पर रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद गरीबों की सेवा का जज्बा वैसा ही है, जैसा बीस साल पहले था। बकौल जमुना देवी, उनकी अपनी कोई औलाद नहीं थी तो भांजे सुरेंद्र को गोद ले लिया था। सुरेंद्र 13 वर्ष की आयु तक अबोहर में ही रहे और आठवीं कक्षा तक की शिक्षा अबोहर के ही एक स्कूल से हासिल की। सुरेंद्र के बेहतर भविष्य के लिए उनके असली माता-पिता उन्हें इंग्लैंड ले गए। इंग्लैंड जाकर सुरेंद्र ने होटल व्यवसाय में सफलता हासिल की, लेकिन अबोहर में बैठी मां जमुना देवी और उनके संस्कारों को भूले नहीं।

मां की समाजसेवा की इच्छा की कद्र करते हुए वह प्रति माह जरूरत के अनुसार पैसा भेजते हैं। इससे वह गरीब परिवारों को राशन बांटती हैं। प्रति माह बांटे जाने वाले राशन पर औसतन पचास हजार रुपये खर्च होते हैं। हर माह की पहली तारीख को गली नंबर छह स्थित आर्य महिला परोपकारिणी सभा के भवन में राशन वितरण कार्यक्रम होता है। इसमें परिवारों को राशन की किट सौंप दी जाती है। राशन किट में आटा, दाल, घी,चायपत्ती व चीनी आदि जरूरी सामान शामिल होता है। जमुना देवी के मुताबिक इस कार्य में उनके साथ कई लोग जुड़े हुए हैं। पंजाबी सभ्याचार मंच के सदस्य राशन वितरण कार्यक्रम आयोजित करने में योगदान देते हैं।

बहुत बड़ी राहत मिलती है
जमुना देवी की ओर से बांटे जाने वाले राशन से लाभान्वित होने वालों में शामिल पुष्पा, बिमला व सुमन कहती हैं कि इससे हमारी घरेलू जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो जाता है। बाकी सामान हम खुद जुटाते ही हैं।

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