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उत्तराखंड में सामने आया ‘महाघोटाला’

इस बार चोट गरीबों को मिलने वाले खाद्यान पर पड़ी है। चावल को लेकर महाघोटाले की जांच में जुटे अधिकारी भी रकम जानकर सकते में आ गए।
कुमाऊं मंडल में सस्ता राशन उपलब्ध कराने की योजना में हुआ घोटाला लगभग 600 करोड़ रुपये का निकला। इस मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच में हर स्तर पर गड़बड़ियां पाई हैं। एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में किसानों से धान की खरीद से लेकर राशन की दुकानों से उपभोक्ताओं तक चावल पहुंचाए जाने में हुई गड़बड़ी को उजागर किया है। वहीं जानकार इसके उत्तराखंड में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला बता रहे हैं।

एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आदेश पर कुमाऊं के संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) को बर्खास्त किया चुका है। अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

कुमाऊं मंडल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से पर्वतीय जनपदों में भेजे जाने वाले सस्ते खाद्यान्न में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री ने दो अगस्त 2017 को एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। एसआईटी ने मिल मालिकों से चावल की खरीद से लेकर इस प्रकरण में राजस्व को हुए नुकसान की जांच की।

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