बुरहान वानी एंड कंपनी की वायरल तस्वीर के सभी आतंकी हुए ढेर।

2015 में कश्मीर में हिज़्बुल कमांडर बुरहान वानी और उसके 10 साथियों की वह तस्वीर जो न सिर्फ वायरल हुई बल्कि देश दुनिया में कई पत्रिकाओं और अखबारों में भी खूब छपी, अब एक इतिहास बन गई है.

इस तस्वीर में बुरहान ब्रिगेड का आखिरी आतंकी वसीम अहमद शाह शनिवार को पुलवामा जिले के भीतर गांवों में मई सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया. फोटो में दिख रहे सभी 10 आतंकी कश्मीर में मारे गए और 11वां आतंकी तारिक पंडित आत्मसमर्पण करने के बाद जेल में सजा काट रहा है.

तस्वीर में बुरहान वानी के साथ जो बाकी 10 आतंकी है उनमें से 2015 में ही बुरहान वानी के साथ-साथ 7 आतंकी मारे गए थे जबकि जबकि बुरहान वानी के उत्तराधिकारी सब्जार भट और एक अन्य को 2016 में मारा गया और मात्र एक बचे आतंकी वसीम शाह को शनिवार को मार गिराया गया.

हालांकि वसीम शाह बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हिज़्बुल मुजाहिदीन छोड़ कर लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया था और शोपियां ज़िले का लश्कर कमांडर था.

2015 में यह तस्वीर वायरल होने के साथ-साथ कश्मीर में आतंकवादियों के लिए प्रचार का एक साधन भी बन गयी थी और माना जा रहा है कि इस तस्वीर के सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने के बाद कई कश्मीरी युवा आतंकवाद की राह पकड़ कर आतंकी समूह में शामिल हो गए. कहीं न कहीं यह एक हकीकत भी है क्योंकि इस से पहले कश्मीर में सक्रिय आतंकी अपनी तस्वीरें इस तरह सामने नहीं लाते थे.

यह कश्मीर में चल रहे करीब तीन दशकों के आतंकवाद में पहला मौका था जब एक साथ 11 आतंकी वह भी खूबसरत और हथियारबंद तरीके से तस्वीरों में नज़र आए थे. उस के बाद कश्मीर में स्थानीय आतंकियों ने सोशल मीडिया को ही अपना हथियार बना कर उसी से आतंकवाद को दिशा भी दी और उसी से अपने समर्थको के बीच जुड़ते रहे.

कश्मीर में सुरक्षा बलों के लिए इस तस्वीर में दिख रहे आतंकियों का खात्मा नाक का सवाल बन गया था और आखिरकार 14 अक्टूबर 2017 को सेना और सुरक्षा बलों ने कांटे की तरह चुभ रही उस तस्वीर को इतिहास बना ही दिया.

लेकिन अब सवाल खड़ा यही होता है कि क्या बुरहान ब्रिगेड के खात्मे से कश्मीर में आतंकवाद का खात्मा हो गया लेकिन शायद ऐसा नहीं होगा क्योंकि बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में 130 स्थानीय युवा आतंकवादी बन गए हैं और रोज़ उन में से कई मारे भी जा रहे हे और रोज़ नए स्थानीय आतंकी भी बनते जा रहे हैं.

कश्मीर में सेना और सुरक्षा बलों की तरफ से ऑपरेशन ऑल आउट चल रहा है लेकिन जानकारों का यही मानना है कि आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए आतंकवादियों को मारने से ज़रूरी उन समस्याओं पर काबू पाना है, जो आतंकवाद को पैदा करते हैं.

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