हाफिज सईद पर फिर मेहरबान हुआ पाकिस्तान

पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद रोधी कानून के तहत मुंबई हमले के सरगना और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद की नजरबंदी बढ़ाने के अनुरोध को शनिवार को वापस ले लिया. सईद और उसके चार सहयोगियों को 31 जनवरी को पंजाब सरकार ने आतंकवाद रोधी कानून, 1997 के तहत 90 दिन के लिए एहतियातन नजरबंद किया था. तब से वे लोग नजरबंद हैं.

पंजाब सरकार के गृह विभाग के एक अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के संघीय न्यायिक समीक्षा बोर्ड से कहा कि सरकार को सईद और उसके चार सहयोगियों को अब और नजरबंद रखने की जरूरत नहीं है. बोर्ड ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया और मामले का निपटारा कर दिया.

पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने लोक व्यवस्था अध्यादेश 1960 के तहत सईद और चार अन्य की नजरबंदी 24 अक्तूबर तक बढ़ाई थी. इससे पहले लाहौर कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जज के निजी कक्ष में सबूत पेश करने की पाकिस्तान सरकार की अपील को मान लिया.

जमात-उद-दावा के प्रवक्ता याहया मुजाहिद ने कहा, 14 अक्टूबर को सरकार ने हाफिज सईद की नजरबंदी पांचवीं बार बढ़ाए जाने के लिए दी गई अपील वापस ले ली है. हालांकि, कोर्ट के आदेश के तहत हाफिज सईद को अक्टूबर महीने के अंत तक नजरबंद रखा जाएगा.

भारत और अमेरिका के दबाव में आकर पाकिस्तान सरकार ने खूंखार आतंकी हाफिज सईद को नजरबंद जरूर कर रखा है, लेकिन उसके खिलाफ अदालत में सबूत देने में आनाकानी कर रही है. लाहौर उच्च न्यायालय ने आगाह किया है कि अगर पाकिस्तान सरकार मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ सबूत दाखिल नहीं करती है, तो उसकी नजरबंदी रद्द कर दी जाएगी.

जमात-उद-दावा सरगना सईद 31 जनवरी से नजरबंद है. मंगलवार को लाहौर उच्च न्यायालय ने उसकी नजरबंदी के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई की. माना जा रहा था कि इस सुनवाई में गृह सचिव हाफिज सईद की नजरबंदी से संबंधित मामले के पूरे रिकॉर्ड के साथ अदालत में पेश होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

कार्यवाही के दौरान गृह सचिव की गैर मौजूदगी से नाराज अदालत ने कहा कि महज प्रेस क्लिपिंग की बुनियाद पर किसी नागरिक को किसी विस्तारित समय तक नजरबंदी में नहीं रखा जा सकता.

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