पर्यटन की आड़ में विदेशी कराते थे किडनी ट्रांसप्लांट

देहरादून : उत्तराखंड में किडनी के अवैध कारोबार के अब तक सबसे बड़े खुलासे ने पुलिस से लेकर सुरक्षा एजेंसियों तक को सकते में डाल दिया है। दरअसल, अब तक की जांच में जो गंभीर बात सामने आई है, वह यह कि पिछले तीन महीनों के दौरान यूरोपीय और एशियाई देशों के दो दर्जन से अधिक विदेशी नागरिक यहां किडनी ट्रांसप्लांट कराकर वापस जा चुके हैं। यह सभी उत्तराखंड में पर्यटन के बहाने पहुंचे थे। इससे एक बात और पुख्ता हो गई है कि गिरोह के विदेशों में भी एजेंट हैं, जो जरूरतमंद नागरिकों को भारत में लाने और उन्हें सुरक्षित वापस भेजने का बंदोबस्त करते थे।

देवभूमि उत्तराखंड में हर साल लाखों की संख्या में विदेशी नागरिक आते हैं। इनमें से अधिकांश का उद्देश्य पर्यटन होता है। इन सभी नागरिकों को देहरादून पुलिस के के विदेशी पंजीकरण अनुभाग में अपना ब्योरा दर्ज कराना होता है, लेकिन यूरोप व एशिया के जिन देशों के नागरिक यहां किडनी ट्रांसप्लांट कराने के उद्देश्य से यहां आए, उन्होंने भारतीय कानून की इस व्यवस्था तक अनदेखी की, ताकि उद्देश्यों की पूरा करने में किसी तरह की बाधा न आए। इसमें गिरोह के एजेंट बड़ी भूमिका निभाते थे। इन एजेंटों को को कानून से सिस्टम की खामियों तक के बारे में भी बखूबी जानकारी, जिससे गिरोह पिछले तीन महीनों से मानव अंग तस्करी को अंजाम तक पहुंचाने में कामयाब रहा। इस खुलासे को लेकर हरकत में आई सुरक्षा एजेंसियों को अब तक आठ विदेशी नागरिकों को पूरा ब्योरा मिल गया है, जो गंगोत्री चैरिटेबल हास्पिटल से किडनी ट्रांसप्लांट कराकर वापस जा चुके हैं।

28 को दून पहुंचे थे ओमान नागरिक 

ओमान के जिन चार नागरिकों की तलाश में दिल्ली समेत देश के अन्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर चेकिंग चल रही है, वह देहरादून 28 अगस्त को पहुंचे थे। यह सभी डोईवाला के एक गेस्ट हाउस में ठहरे थे। जहां से स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआइयू) उनका पूरा रिकार्ड जब्त कर लिया है। सूत्रों की मानें तो इस गेस्ट हाउस में कई और विदेशी नागरिकों के ठहरने के प्रमाण मिले हैं, जिनके बारे में जानकारी जुटाने के लिए संबंधित देशों के दूतावास के जरिए जानकारी जुटाई जाएगी।

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