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कश्मीर फिर बना भाईचारे का गवाह, पंडित महिला की मौत पर मुस्लिम शोक में डूबे

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर का कंधार कहलाने वाले त्राल (पुलवामा) जिसे इस्लाम के नाम पर खून बहाने वाले जिहादियों का मजबूत गढ़ माना जाता है। वहां मंगलवार को एक कश्मीरी पंडित महिला की मौत पर उसके मुस्लिम पड़ोसियों की आंखू से निकलती आंसुओं की धार में एक बार फिर कश्मीरियत और इंसानियत की भावना बहती नजर आई।

सोमवार रात नीलम पंडिता नामक महिला की हृदयाघात से मौत हो गई। उसके मुस्लिम पड़ोसी उसी समय मृतका के घर पहुंचे। उन्होंने उसके परिजनों को सांत्वना देते हुए उसके अंतिम संस्कार की तैयारी की। मंगलवार पूरा दिन कस्बे में दुकानें और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान भी स्थानीय लोगों ने बंद रखे। फारूक त्राली नामक एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि नीलम पंडिता कश्मीरी पंडित बेशक थी, लेकिन हमारी बहन थी। वह हमारे गांव की बेटी थी। उसकी मौत का गम हम सभी को है। उसका पति और वह बहुत ही मिलनसार थी।

जिला उपायुक्त पुलवामा गुलाम मुहम्मद डार ने भी पीडि़त परिवार के पास जाकर अपनी संवेदना जताई और दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से भले ही कश्मीर में अशांति हो, लेकिन यहां लोग अभी भी कश्मीरियत नहीं भूले हैं।

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