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500 करोड़ के कर्ज से जलेंगे दीपावली के दीये

देहरादून : सरकारी कार्मिकों को दीपावली के मौके पर बकाया एरियर, महंगाई भत्ता और निगमों-उपक्रमों को सातवें वेतनमान का तोहफा देने के लिए सरकार को एक बार फिर बाजार से उधार लेने को मजबूर होना पड़ा है। सरकार ने 500 करोड़ का ऋण लिया है। इसे मिलाकर अब तक 2200 करोड़ का ऋण लिया जा चुका है।

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राज्य की खराब माली हालत से जूझ रही सरकार को कर्ज लेकर अपने कार्मिकों को घी पिलाना पड़ रहा है। कार्मिकों के वेतन-भत्तों, मानदेय पर ही कुल बजट का 83 फीसद से ज्यादा खर्च हो रहा है। इस खर्च की पूर्ति के लिए सरकार बाजार से ऋण उठाने पर मजबूर है।

हालांकि, ऋण की सीमा राज्य के लिए रिजर्व बैंक की ओर से तय किए गए दायरे के भीतर ही है। रिजर्व बैंक ने राज्य के लिए चालू वित्तीय वर्ष में कर्ज की सीमा 5850 करोड़ से बढ़ाकर 6422 करोड़ कर दी है।

अभी राज्य में सरकारी कार्मिकों को सातवें वेतनमान के मुताबिक भत्ते नहीं दिए गए हैं। बड़ी संख्या में सरकारी निगम-उपक्रम, निकाय और प्राधिकरण के हजारों कार्मिकों को सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिला है। नए वेतन और भत्ते की मांग को लेकर कर्मचारी संगठन आंदोलन की राह पर हैं।

यह दबाव जितना बढ़ेगा, सरकार उतना ही अधिक कर्ज लेने को मजबूर होगी। सातवां वेतनमान लागू करने के बाद सरकारी खजाने पर हर माह तकरीबन 150 करोड़ से ज्यादा भार बढ़ चुका है। बकाया एरियर देने में ही करीब 500 करोड़ का भार सरकार पर पड़ रहा है। वहीं महंगाई भत्ता देने पर सरकारी खजाने पर 12 करोड़ का बोझ बढ़ेगा।

कुछ दिन पहले भी सरकार ने 400 करोड़ ऋण लिया था। अब 500 करोड़ का और ऋण लिया गया है।

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