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‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 78वीं वर्षगांठ: चमोली के एकमात्र जीवित स्वतंत्रता सेनानी का 103 साल की उम्र में भी वही जज्बा

bharat chhodo aandolan
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चमोली: आज यानि 9 अगस्त को पूरा देश ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (bharat chhodo aandolan) की 78वीं बरसी मना रहा है। इसे “अगस्त क्रांति” के नाम से भी जाना जाता है। यह आंदोलन 1942 में शुरू हुआ था जिसने ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिलाकर रख दीं और उन्हें भारत छोड़ने को मजबूर कर दिया।

अंग्रेजो भारत छोडो आंदोलन (bharat chhodo aandolan) की 78वीं वर्षगांठ पर वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन किया गया। जनपद चमोली में एकमात्र जीवित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बख्तावर सिंह को उप जिलाधिकारी वैभव गुप्ता ने श्रीकोट गांव में उनके आवास पर जाकर अंग वस्त्र एवं शाॅल भेंट कर सम्मानित किया।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बख्तावर सिंह का जन्म 1918 में हुआ था और 103 वर्ष की आयु में आज भी देशभक्ति का वही जजबा उनके दिल में है, जो हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। भारत छोड़ो आंदोलन की 78वी वर्षगांठ पर रविवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वख्तावर सिंह को सम्मानित किया गया।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (bharat chhodo aandolan) में उत्तराखंड के 21 स्वतंत्रता सेनानी शहीद हुए और हजारों को गिरफ्तार किया गया। नतीजा जगह-जगह आंदोलन भड़क उठे। इसी दौरान खुमाड (सल्ट) में आंदोलनकारियों पर हुई फायरिंग में दो सगे भाइयों गंगाराम व खीमदेव के अलावा बहादुर सिंह व चूड़ामणि शहीद हुए।

महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन में सल्ट की सक्रिय भागीदारी के कारण इसे भारत की ‘दूसरी बारदोली’ से गौरवान्वित किया था। इस बीच आजाद हिन्द फौज की नींव रखी जा चुकी थी, जिसमें शामिल 800 गढ़वाली सैनिकों ने अंग्रेजों से लड़ते हुए आजादी के लिए प्राणों का उत्सर्ग किया। नेताजी की फौज के 23,266 सैनिकों में लगभग 2,500 सैनिक गढ़वाली थे।

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