Tuesday, October 20News That Matters
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IPS बरिंदर जीत सिंह ने डीजीपी समेत उच्च अधिकारियों के खिलाफ खोला मोर्चा, पहुंचे हाईकोर्ट

ips barinder jeet singh
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देहरादून: उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर ब्यूरोक्रेट के तबादले राजनीति दखल से होने के चर्चे कई बार सामने आये। कई बार ब्यूरोक्रेट की पदस्थापना उनकी योग्यता से नहीं बल्कि नेताओं की गणेश परिक्रमा से होने के भी चर्चे हुए तो कभी नेताओं से अनबन को लेकर तबादलों की बात सामने आई। प्रदेश में पिछले कुछ समय से आईएएस,आईपीएस और आईएफएस अफसरों के लगातार तबादले किए जा रहें हैं। इस बीच ऊधमसिंह नगर के पूर्व एसएसपी बरिंदर जीत सिंह (IPS Barinder Jeet Singh) तबादला आदेश के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए हैं।

IPS Barinder Jeet Singh ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

उन्होंने डीजीपी अनिल रतूडी, डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार और पूर्व आईजी कुमाऊं जगतराम जोशी के खिलाफ प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। मामले में हाई कोर्ट ने अब संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

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दरअसल, कुछ दिन पूर्व ऊधमसिंह नगर के एसएसपी बरिंदर जीत सिंह (IPS Barinder Jeet Singh) का तबादला शासन ने आइआरबी कमांडेंट के पद पर कर दिया था। उनकी जगह पौड़ी गढ़वाल के एसएसपी दलीप सिंह कुंवर को ऊधमसिंह नगर की कमान सौंप दी गई।

इसके बाद आईपीएस बरिंदर जीतसिंह (IPS Barinder Jeet Singh) ने डीजीपी अनिल रतूडी, डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार व पूर्व आईजी कुमाऊं जगतराम जोशी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि, ऊधमसिंह नगर में तैनाती के दौरान डीजीपी अनिल रतूड़ी ने उन्हें महत्वपूर्ण मामलों में निष्पक्ष जांच करने से रोका। इसके बावजूद निष्पक्ष जांच जारी रखने के लिए उन्हें चेतावनी भी दी गई।

इतना ही नहीं उन्होंने (IPS Barinder Jeet Singh) आरोप लगाया है कि, जब उन्होंने पत्राचार किया तब चेतावनी वापस ले ली गई, लेकिन उत्पीडऩ जारी रहा। उन्होंने आगे  कहा कि, 12 साल की सेवा में ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठ होने का इनाम आठ तबादले करके दिया गया।

हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर माँगा जवाब

मामले में हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ व न्यायाधीश एनएस धानिक की खंडपीठ ने डीजीपी, डीजी कानून व्‍यवस्‍था व पूर्व आईजी को नोटिस जारी कर 20 अगस्त तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को तय की गई है।

वहीं एक बड़े अधिकारी के इस तरह के आरोपों से एक बार फिर प्रदेश में तबादला निति और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।

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