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उत्तराखंड की पहचान ‘राज्य पुष्प ब्रह्मकमल’ खतरे में

उत्तराखंड की पहचान राज्य पुष्प ब्रह्मकमल खतरे में है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के पंचकेदार एरिया में किए गए सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसके पीछे की वजह भी कम हैरान करने वाली नहीं है।

सर्वे के आधार पर तैयार नेचर गाइड का मंगलवार को डब्ल्यूआईआई के वार्षिक शोध सम्मेलन में विमोचन किया गया। डब्ल्यूआईआई के डीन डा. जेएस रावत के अनुसार केदारनाथ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और आसपास के करीब 900 वर्ग किलोमीटर में एक व्यापक सर्वे किया गया। इसमें फूलों की घाटी और आसपास के हाई एल्टीट्यूट एरिया में पाए जाने वाले 550 जंगली फूलों का एक डाटाबेस तैयार किया गया है। इस सर्वे में ब्रह्मकमल काफी कम दिखा। नंदीकुंड, द्वाराखाल और मंदिनी में कुछ ही ब्रह्मकमल पाए गए। पिछले कुछ सालों में इस इलाके में करीब 70 प्रतिशत तक इन फूलों की संख्या में कमी आई है।

डब्ल्यूआईआई के दो दिवसीय वार्षिक शोध सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण सचिव अजय नारायण झा ने कहा कि देश भर के शोध संस्थानों को अपने अपने शोध सरल भाषा में ई बुक्स और इंटरनेट पर उपलब्ध कराने चाहिए। ताकि छात्रों और आम लोगों को उसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूआईआई जैसे संस्थानों कों वाइल्ड लाइफ से जुड़े शोधों पर ज्यादा फोकस करना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि उत्तराखंड सहित सभी राज्यों को क्षतिपूरक वनीकरण के लिए मिला बजट सही तरीके से और समय पर खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखंड को इसके लिए 1500 करोड़ का बजट मिला है जो उसे खर्च करना है। कार्यक्रम में डब्ल्यूआईआई के निदेशक डा. वीबी माथुर, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डीबीएस खाती,एपीसीसीएफ डा. धनंजय मोहन, राजाजी पार्क डायरेक्टर सनातन सहित बड़ी संख्या में वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।

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