रानी दुर्गावती की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि : वंशिका सोनकर
जनसेवी वंशिका सोनकर ने वीरांगना रानी दुर्गावती के योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें प्रणाम् कर कहा कि आज रानी माता का बलिदान दिवस है। आज के ही दिन मुगलों से लोहा लेते हुए उन्होंने अपना बलिदान दिया था, वे स्वधर्म-संस्कृति और स्वाभिमान के लिए अंतिम सांस तक लड़ी।

देहरादून। युवा भाजपा नेत्री, प्रसिद्ध समाजसेवी एवं वार्ड संख्या 18 इंदिरा कॉलोनी की नगर निगम पार्षद वंशिका सोनकर ने भारत की महान योद्धा, अमर बलिदानी वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुए सादर नमन किया।
जनसेवी वंशिका सोनकर ने इस दौरान जारी अपने संदेश में कहा- महोबा के प्रसिद्ध चंदेल वंश की वंशज और गढ़ा-कटंगा के गोंड साम्राज्य की रानी, स्वाभिमान और बलिदान की प्रतिमूर्ति, रानी दुर्गावती की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मातृभूमि की रक्षा हेतु आपका महान बलिदान हमें युगों-युगों तक ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव से पोषित करता रहेगा।

पार्षद वंशिका सोनकर ने वीरांगना रानी दुर्गावती के योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें प्रणाम् कर कहा कि आज रानी माता का बलिदान दिवस है। आज के ही दिन मुगलों से लोहा लेते हुए उन्होंने अपना बलिदान दिया था, वे स्वधर्म-संस्कृति और स्वाभिमान के लिए अंतिम सांस तक लड़ी। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती सुशासन की सूत्रधार थीं। उन्होंने लगभग 23 हजार गाँवों में विकास के अद्भुत कार्य किए थे, वे सभी गाँव धन-धान्य से परिपूर्ण थे। उन्होंने अपने अल्प जीवन काल में 52 लडा़इयाँ लड़ी, जिनमें 51 में उन्होंने विजय प्राप्त की थी।
वंशिका सोनकर ने वीरांगना रानी दुर्गावती के अदम्य साहस और संघर्ष का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अकबर की सेनाओं को तीन बार पराजित किया था। तब आसफ खाँ ने विशाल सेना लेकर अक्रमण किया और जब यह लगा कि अब विजय कठिन है तो रानी दुर्गावती ने अपनी कटार सीने में उतार कर अपना बलिदान दे दिया। रानी माँ हम सबकी श्रद्धा और आस्था की केन्द्र हैं, रानी माँ हमें स्वाभिमान, सम्मान और स्वधर्म के लिए सब कुछ न्यौछावर करने के लिए प्रेरित करती हैं।



